केंद्र सरकार अगले वित्त वर्ष के पहले तीन माह के लिए अंतरिम बजट पेश करने की तैयारी कर रही है। हर किसी को बजट से राहत मिलने से कई उम्मीदें होती हैं। वहीं युवाओं का तर्क है कि शिक्षा के लिए कर्ज सस्ती ब्याज दर पर दिया जाए, साथ ही रोजगार के अवसर बढ़ाने के इंतजाम किए जाएं, ताकि हर युवा को उसकी पसंद एवं शिक्षा के अनुसार रोजगार मिल सके।
युवा डॉक्टर तवलीन कौर का कहना है कि प्रोफेशनल शिक्षा लगातार महंगी हो रही है। यह आम आदमी की पहुंच से बाहर हो रही है। हालांकि बैंक उदारता के साथ शिक्षा लोन दे रहे हैं। पर ब्याज की दर को कम करना अनिवार्य है ताकि युवा अपनी उच्च शिक्षा को आसानी से पूरा कर सकें। साथ ही प्रोफेशनल को आगे बढ़ने के लिए अधिक अवसर मुहैया कराने की दिशा में प्रयास करना अनिवार्य है। इसके साथ ही सरकारी क्षेत्र में सेहत सेवाओं को और मजबूत करने की जरूरत है, ताकि ग्रामीण स्तर तक भी सस्ती सेहत सेवाएं उपलब्ध हो सकें।
युवा चार्टर्ड अकाउंटेंट सुरभि सहगल का कहना है कि आम लोगों पर टैक्सों का बोझ काफी अधिक है। इससे लोगों की बचत प्रभावित हो रही है। करों का बोझ कम करके आम आदमी को राहत मिलना आवश्यक है। खास कर आयकर में छूट की सीमा को बढ़ाकर आमजन को बड़ी राहत दी जा सकती है। हालांकि वस्तु एवं सेवा कर लगा कर कई अप्रत्यक्ष करों को खत्म किया गया है, बावजूद इसके अभी भी कई तरह के कर, सरचार्ज एवं सेस का बोझ आम आदमी के सिर पर है। कर की दर को कम करके करदाताओं का दायरा बढ़ाया जा सकता है। इस तरफ ध्यान देने की जरूरत है।
युवा कंपनी सेक्रेटरी शिवांगी सेठी का तर्क है कि बजट में मिनिमम वेज में इजाफा करना आवश्यक है। महंगाई के दौर में मौजूदा मिनिमम वेजेज के साथ गुजारा करना कठिन हो रहा है। मिनिमम वेज कम से कम बीस हजार रुपये प्रति माह होना चाहिए। साफ है कि मध्यम वर्ग को खुशहाल करने के लिए नए उपाय करने की जरूरत है। इसके अलावा देश में ही रोजगार के उम्दा अवसर पैदा करने की दिशा में काम करना होगा, ताकि यहां से होनहार विदेशों में अपने भविष्य की तलाश न करें। बजट में युवाओं के विकास के लिए अलग से फंड रखने की जरूरत है। बेरोजगारी कम करने को कदम उठाए जाएं: साहिल
खालसा कॉलेज में स्नातक कर रहे साहिल वर्मा ने कहा है कि एक तरफ उद्योग जगत में कामगारों की भारी कमी देखी जा रही है। दूसरी तरफ बेरोजगारी बढ़ रही है। इस गैप को कम करने के लिए ठोस उपाय करने की जरूरत है। वक्त पर रोजगार मिलने से युवा इधर उधर नहीं भटकेगा और इससे राष्ट्र निर्माण में भी मदद मिलेगी। इसके लिए प्रोफेशनल शिक्षा को और दिशा देने की जरूरत है ताकि इंडस्ट्री की जरूरतों के अनुसार युवाओं को तैयार किया जा सके। हालांकि युवाओं को ट्रेंड करने के लिए स्किल सेंटर खोले जा रहे हैं। लेकिन रोजगार के इंतजाम भी उसी अनुरूप करने होंगे।
Source - Jagran
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