Saturday, 9 July 2016

रोडवेजकर्मी, भामसं शिक्षकों ने मांगों को लेकर सरकार प्रशासन को घेरा


रोडवेजकर्मी, भामसं शिक्षकों ने मांगों को लेकर सरकार प्रशासन को घेरा

राजस्थानपरिवहन निगम संयुक्त मोर्चा ने प्रदेश के आह्वान पर सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ एवं रोडवेज के निजीकरण करने के विरोध में शुक्रवार को अर्धनग्न प्रदर्शन कर राज्य सरकार की शवयात्रा निकालकर कर पुतला दहन किया। वक्ताओं ने बताया कि सरकार रोडवेज में जनविरोधी नीतियां अपना रही हैं। तीन वर्ष से नई बसों को नहीं खरीदा गया है। चालक-परिचालक एवं तकनीशियनों की भर्ती नहीं की जा रही है। प्रदेश में चार हजार गाडिय़ों में से ढाई हजार बसें कंडम हो चुकी हैं। जबकि अन्य प्रांतों में रात्रि विश्राम भत्ता 150 रुपए देय है। जबकि राजस्थान में मात्र 30 रुपए ही दिया जा रहा है। कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति पर पूरा हिसाब नहीं किया जा रहा है। कर्मचारियों को ओवरटाइम वेतन भी समय पर नहीं दिया जा रहा है। इस कारण रोडवेज के कर्मी परेशान हो रहे हैं। राज्य सरकार लोक परिवहन सेवा की बसों को बढ़ावा दे रही है। इसे कर्मचारी हर कीमत पर सहन नहीं करेंगे। इस अवसर पर 11 जुलाई को शाम 7 बजे केन्द्रीय बस स्टैंड से मशाल जुलूस निकालने का निर्णय लिया गया।इस अवसर पर भामसं के जिलाध्यक्ष मेंबर सिंह कुंतल, एटक के प्रदेश उपाध्यक्ष राजेन्द्र सिंह सोलंकी, बहादुर सिंह, नीरज शर्मा, यदुनाथ सिंह, विनोद चौधरी, मुकेश, राधेश्याम वर्मा, धर्मेंद्र, शिवसिंह, सुगनसिंह कसाना, रामपाल, भूपेन्द्र, राष्ट्रीय परिवहन मजदूर महासंघ की राष्ट्रीय सदस्य तारा चौधरी, हेमलता, रूवेश सहित बड़ी संख्या में रोडवेज कर्मचारी मौजूद थे। 

भरतपुर. प्रदर्शन करते अखिल विद्यार्थी परिषद के पदाधिकारी। 

भरतपुर. भामसं की रैली में शामिल पदाधिकारी। 

भरतपुर। भारतीय मजदूर संघ के जिलाध्यक्ष मेंबर सिंह कुंतल के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने मांगों के समर्थन में रैली निकालकर कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम जिला कलेक्टर एलएन सोनी को ज्ञापन सौंपा। दोपहर को मानसिंह सर्किल से जुलूस प्रारंभ हुआ, जो कि बिजलीघर चौराहा होते हुए केन्द्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए चल रहा था। जुलूस केन्द्र राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर कलेक्ट्रेट पहुंचा। जुलूस में भामसं के पदाधिकारी, कार्यकर्ता एवं आंगनबाड़ी के महिलाएं आगे-आगे चल रही थीं। ज्ञापन में लिखा है कि श्रमिक विरोधी श्रम कानूनों में बदलकर अविलंब रोक की मांग, 13 क्षेत्रों में प्रत्यक्ष विदेशी पूंजी निवेश, माडल शॉप एवं इस्टबिलसिमेंट एक्ट को बिना श्रमिक प्रतिनिधियों की सहमति से स्वीकृत करना एवं 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों में श्रमिक प्रतिनिधियों द्वारा की गई आपत्तियों को नजरअंदाज करने आदि विषयों को लेकर सरकार का ध्यान आकृष्ट किया गया है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने कहा कि केंद्र सरकार 7 वें वेतन आयोग का लाभ देकर दुर्वव्हार कर रही है। वहीं 7 वें वेतन आयोग की सिफारिशों में श्रमिक प्रतिनिधियों ने कहा कि केंद्र राज्य सरकार श्रमिकों के साथ अन्याय करती रही है। उन्होंने कहा कि अगर जल्द ही सरकार ने श्रमिक विरोधी नीतियों को दूर न्याय नहीं किया तो इसके परिणाम सरकार को ही भुगतने पड़ेंगे। क्योंकि देश में एक बड़ा तबका मजदूर वर्ग का ही है। मजदूर की मेहनत पर ही सबसे पहले देश का विकास का भार टिका हुआ है। इस अवसर पर भामसं के जिला मंत्री प्रकाश चंद शर्मा, शंभूदयाल शर्मा, बहादुर सिंह, सुगनसिंह कसाना, बाबूलाल चाहर, नीरज शर्मा, विजय सिंह, विवेक नंदन माथुर, जितेन्द्र शर्मा, मुकेश, शिव, विमला चौधरी, तारा चौधरी, योगेश कुमारी, हेमलता, विजय सिंह, रामपाल, जगमोहन मित्तल, वेदप्रकाश सोलंकी, टीकम सहित बड़ी संख्या में भामसं पदाधिकारी, कार्यकर्ता एवं आंगनबाड़ी महिलाएं मौजूद थीं।
SOURCE - BHASKER