Sunday, 1 May 2016

मध्यप्रदेश: हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, प्रमोशन में आरक्षण को बताया 'अवैध'

जबलपुर. जबलपुर हाईकोर्ट ने शनिवार को पदोन्नति में आरक्षण को अवैध करार देते हुए मप्र लोक सेवा (पदोन्नति) नियम-2002 को निरस्त कर दिया। कोर्ट ने यह भी कहा कि अब तक जितनी पदोन्नतियां दी गई हैं, वे न मानी जाएं। बता दें कि 35 पेज के फैसले में कोर्ट ने कहा कि प्रदेश सरकार चाहे तो पदोन्नति के लिए नया नियम बना सकती है। इस संबंध में लगी 20 याचिकाओं पर कोर्ट ने ये फैसला सुनाया। 
इस फैसले से मप्र में करीब 70 हजार से अधिक लोकसेवक रिवर्ट हो जाएंगे। प्रदेश सरकार इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएगी। कोर्ट का फैसला आते ही वल्लभ भवन और कर्मचारी संगठनों में हड़कंप मच गया। अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति अधिकारी कर्मचारी संघ (अजाक्स) ने इसके लिए सीधे तौर पर सरकार जिम्मेदार ठहराया है। 

हाईकोर्ट ने फैसला देते हुए कहा कि नियुक्तियों के दौरान वंचित वर्गों को आरक्षण मिलना सही है, परन्तु प्रमोशन में आरक्षण दिए जाने से योग्य लोगों में नाकारात्मक भाव आता है। इसलिए पदोन्नति प्रक्रिया में सामान्य वर्ग को पीछे रखना किसी भी कोण से न्यायोचित नहीं माना जा सकता।

गौरतलब है कि हाईकोर्ट के इस फैसले से प्रदेश के करीब 20 हजार से अधिक कर्मचारियों पर असर पड़ेगा। और लगभग इतने ही अधिकारियों को झटका लग सकता है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि उनकी सरकार शासकीय सेवाओं में पदोन्नति में आरक्षण की पक्षधर है। उन्होंने कहा कि पदोन्नति में आरक्षण समाप्ति के संबंध में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट जबलपुर द्वारा जो निर्णय दिया गया है, उसके विरुद्ध राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट में अपील करेगी। 

SOURCE - haribhoomi